विश्व धरोहर UNESCO World Heritage Site में शामिल हुए यह अद्भुत काकतेय रुद्रेश्वर मंदिर, तेलंगाना इंडिया

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यूनेस्‍को की वर्ल्‍ड हेरिटेज साइट (UNESCO World Heritage Site) ने तेलंगाना के काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple) को विश्‍व धरोहर में शामिल किया है। इसे विश्‍व धरोहर के रूप में स्थान पाने वाला भारत का 39वां साइट बना है। 

काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple)
काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple)  साभार (यूनेस्को ट्विटर अकॉउंट


काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर कहाँ स्थित है?

काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple) मंदिर वारंगल की हनमकोंडा पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर को रुद्रेश्वर स्वामी मंदिर नाम से जाना जाता है। मंदिर परिसर में 1000 स्तंभ होने की वजह से इसे हज़ार स्तंभों वाला मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर के मुख्य दरवाजे पर भगवान शिव के प्रिय नन्दी बैल की विशाल प्रतिमा स्थापित है। जिसे एक काले पत्थर को तराश कर बनाया गया है।

काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर के अन्य नाम

मंदिर परिसर में 1000 स्तंभ होने की वजह से इसे हज़ार स्तंभों वाला मंदिर भी कहा जाता है।  हजार खंभों वाले मंदिर नाम से भी ज्ञात है।

इस मंदिर में भगवान शिव के साथ भगवान श्रीहरि और सूर्य देवता भी हैं, लेकिन भगवान शिव को समर्पित इस मंदिर में मुख्य रूप से रामलिंगेश्वर स्वामी की पूजा होती है। तो यह अद्भुत मंदिर रामलिंगेश्वर स्वामी मंदिर नाम से भी अभिज्ञात है।

शिल्पकार रामप्पा द्वारा निर्मित होने और इसे रामप्पा मंदिर (Ramappa Temple) भी कहा जाता है।


काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple)  साभार (यूनेस्को ट्विटर अकॉउंट
काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple)  फ़ोटो साभार प्रधानमंत्री जी के ट्विटर अकॉउंट


रामप्पा मंदिर(Ramappa Temple) क्यों कहा जाता है?

तेलंगाना के काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple कोमहान शिल्पकार रामप्पा जी ने 40 वर्षों के अथक परिश्रम के बाद वास्तु और शिल्प के अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करने वाले काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर का निर्माण किया थे। इस मंदिर को उनके शिल्पकार रामप्पा जी के नाम से भी जाना जाता है। छह फीट ऊंचे सितारे जैसे प्लेटफार्म पर निर्मित यह मंदिर वास्तु शिल्प का अद्भुत उदाहरण है।


हजार खंभों( स्तंभों) पर टिका यह मंदिर कई प्राकृतिक आपदाओं को झेलने के बावजूद अभी भी पर्यटकों और शिल्पकला मर्मज्ञों का ध्यान आकर्षित कर लेता है। कई अत्याचारी विधर्मियो के शाषण के दौरान भी यह मंदिर खुद को बचाये हुए रहा। इस मंदिर को 14वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया था। मंदिरों के अवशेषो को जोड़ कर इसका निर्माण फिर से किया गया है


रुद्रेश्वर महादेव शिवलिंग स्वयंभू हैं- 

तेलंगाना के काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple) के मंदिर का शिवलिंग स्वयंभू है।  एक कथा के मुताबिक 12वीं सदी के दौरान अनाज बाज़ार हनामकोंडा में जाने के लिए किसानों का रास्ता इसी स्थान से गुजरता था।  एक दिन यहां पर एक किसान की बैलगाड़ी का पहिया कीचड़ में फंस गया। पहिये को कीचड़ से निकलनाउस अकेले किसान के वश में नही रह जब कुछ किसानों और राहगीरों ने मिलकर ने उस पहिये को बाहर निकालने का प्रयास किया तो उन्हें वहां पर एक शिवलिंग दिखा। बाद में लोगों ने इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण किया। इसी कारण इस मंदिर को स्वयंभू नाम पड़ा। स्वयंभू का शाब्दिक अर्थ है जो स्वयं इस भूमि पर आया हो। 


दक्षिण भारत के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक Telangana तेलंगाना के प्रसिद्ध काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple) अपने निर्माण एवं अद्भुत नक्काशी के बल पर  विश्व धरोहरों में शामिल हो गया है।


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि। 

Excellent! Congratulations to everyone, specially the people of Telangana.

The iconic Ramappa Temple showcases the outstanding craftsmanship of great Kakatiya dynasty. I would urge you all to visit this majestic Temple complex and get a first-hand experience of it’s grandness.(अद्भुत! सभी को बधाई, खासकर तेलंगानावासियों को। मैं लोगों से आग्रह करता हूं कि वे काकतीय वंश द्वारा निर्मित इस अद्भुत मंदिर का अनुभव जरूर लें।)

काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple)
काकतीय रुद्रेश्‍वर (रामप्पा) मंदिर (Kakatiya Rudreshwara (Ramappa) Temple)  साभार PM's Tweets


मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने भी यूनेस्को के निर्णय का स्वागत करते हुए खुशी जताई। उनके साथी तेलंगाना के मंत्री श्री केटी रामा रावजी ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्‍नता जताई। उन्‍होंने ट्वीट कर कहा


 Happy to share the good news that the 800 year old Kakatiya Rudreshwara #RamappaTemple in #Telangana has been inscribed as a UNESCO #WorldHeritage Site. My compliments to everyone who was involved in the effort.

(आप सभी को एक अच्‍छी खबर साझा कर रहा हूं। यूनेस्‍को ने तेलंगाना के 800 साल पुराने काकतीय रुद्रेश्‍वर मंदिर को विश्‍व धरोहर में शामिल कर लिया है। मैं इसके लिए प्रयासरत सभी लोगों को बधाई देता हूं। यह मंदिर तेलंगाना की पहली वर्ल्‍ड हेरिटेज साइट है। हमरा अगला लक्ष्‍य राजधानी हैदराबाद को वर्ल्‍ड हेरिटेज सिटी का दर्जा दिलाना है।)




फ़ोटो-  प्रधानमंत्री जी और यूनेस्को के ट्विटर अकाउंट से साभार

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